Friday, June 11, 2010

उषा प्रारब्ध

हम फरिश्ते में भी आदमी -
आदमी की तरह
जो रहे आदमी
है सिकन्दर जहॉ में
वही आदमी

पीर फकीर ना ही कोई फरिश्ते ढूंढेगें
इस भीडृ में हम ढूंढेगें तो
आदमी के लिए
बस आदमी ढूढेंगें

मिस्जदों मन्दिरों कही किसी
चर्च गुरुद्वारे में नहीं हम तो

दिलों की इमारत ही में अपने
कुरान गीता बाइबल ढूंढेंगें

हद से ना किसी भी सरहद से बंधेगें हम तो
परिन्दें हैं सरहदें छोड उंचे आसमानों में उड़ेगें ।

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