उसूल
जब भी
झपटना हो
रंग बदल लेता है
गिरगिट
झपटती है छिपकली
चुपके से
पशु की तरह ही पशु
बेकटके
करते है
उजाड़
कुछ भी मनुष्य जैसा
मनुष्य में आचरण क्यो
तय नहीं
0
उस मकान में
उस मकान में
अभी अभी वह औरत
रहने आयी है
कभी घुप्प अंधेरा रहा करता थ
उसमें अब रोशनी
रहा करती है ।
Saturday, April 10, 2010
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